Sakat Chauth Vrat Katha 3 मुखय कहानियाँ:-

Sakat Chauth एक हिंदू व्रत है जो माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस व्रत को तिल चौथ, माघी चौथ, संकष्टी चतुर्थी और तिल कुटनी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति और संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।


Sakat Chauth Vrat Katha 1 :- 

एक समय की बात है, एक साहूकार और उसकी पत्नी थीं। वे धर्म-कर्म में विश्वास नहीं करते थे और अपने जीवन में केवल धन-संपत्ति के पीछे भागते रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन साहूकार की पत्नी अपने पड़ोसन के घर गई। उस दिन Sakat Chauth Vrat था। पड़ोसन व्रत की पूजा करके कहानी सुन रही थी। साहूकार की पत्नी ने पड़ोसन से पूछा कि तुम क्या कर रही हो? तब पड़ोसन ने बताया कि आज सकट चौथ का व्रत है, इसलिए मैं कहानी सुन रही हूं। तब साहूकार की पत्नी ने पूछा कि चौथ के व्रत करने से क्या होता है?

पड़ोसन ने बताया कि चौथ के व्रत करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है, संतान की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह सुनकर साहूकार की पत्नी ने मन ही मन सोचा कि अगर मैं भी इस व्रत को रखूं तो मुझे भी संतान की प्राप्ति होगी।

उस दिन साहूकार की पत्नी ने सकट चौथ का व्रत रखा। व्रत के बाद उन्होंने गणेश जी की पूजा की और चौथ माता की कथा सुनी। कथा सुनकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मन ही मन चौथ माता से प्रार्थना की कि उन्हें संतान की प्राप्ति हो।

व्रत के अगले दिन साहूकार की पत्नी को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। साहूकार और उसकी पत्नी बहुत खुश हुए। उन्होंने चौथ माता की कृपा से धन्यवाद दिया।

कथा का सार:-

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि सकट चौथ का व्रत बहुत ही पुण्यफलदायी है। इस व्रत को रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है, संतान की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Sakat Chauth Vrat Katha 2 :- 

एक समय की बात है, एक राजा था जिसकी कोई संतान नहीं थी। राजा ने बहुत से उपाय किए, लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं हुई। एक दिन राजा ने एक साधु से सलाह ली। साधु ने राजा को बताया कि उसे Sakat Chauth Vrat रखना चाहिए।

राजा ने सकट चौथ का व्रत रखा और चौथ माता की कथा सुनी। कथा सुनकर राजा को बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मन ही मन चौथ माता से प्रार्थना की कि उन्हें संतान की प्राप्ति हो।

व्रत के अगले दिन राजा को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। राजा और रानी बहुत खुश हुए। उन्होंने चौथ माता की कृपा से धन्यवाद दिया।

कथा का सार:-

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि सकट चौथ का व्रत बहुत ही पुण्यफलदायी है। इस व्रत को रखने से संतान की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Sakat Chauth Vrat Katha 3 :- 

एक समय की बात है, एक कुम्हारनी थी जिसकी कोई संतान नहीं थी। कुम्हारनी ने बहुत से उपाय किए, लेकिन उसे कोई संतान नहीं हुई। एक दिन कुम्हारनी ने एक बूढ़ी महिला से सलाह ली। बूढ़ी महिला ने कुम्हारनी को बताया कि उसे सकट चौथ का व्रत रखना चाहिए।

कुम्हारनी ने सकट चौथ का व्रत रखा और चौथ माता की कथा सुनी। कथा सुनकर कुम्हारनी को बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मन ही मन चौथ माता से प्रार्थना की कि उन्हें संतान की प्राप्ति हो।

व्रत के अगले दिन कुम्हारनी को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। कुम्हारनी बहुत खुश हुई। उन्होंने चौ